रविवार, 10 मई 2020

11 May : National Technology Day In India (11 May 2020) Nuclear Bomb In India

क्या है 11 मई?


11 May भारत मे National Technology Day के रूप में मनाया जाता है। यह दिन इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगो को विज्ञान में रुचि लेने के लिए प्रेरित किया जाए और ज्यादा से ज्यादा बच्चे विज्ञान की पढ़ाई करें। आज के कुछ समय पहले हमारा देश इतना आगे नही था विज्ञान में लेकिन आज उसने बहुत तरक्की कर ली है । इस बार 11 मई 2020 21 वां national technology day के रूप में मनाया जाएगा।


क्यों मनाते हैं National Technology Day?



 यह दिवस सिर्फ भारत मे ही मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 11 May 1998 में पोखरन में भारत ने अपना  पहला परमाणु परीक्षण किया था जो सफल भी हुआ था। इस परीक्षण के सफल होते ही भारत देश की तस्वीर ही बदल गयी। बड़े बड़े देश भारत को सलाम ठोकने लगे। और भारत विश्व का 6वां देश बन गया जिसके पास परमाणु हथियार था।

क्या हुआ था 11 May 1998 को?


इस दिन भारत ने अपना पहला सफल परमाणु परीक्षण किया था। ये काम चोरी से किया गया था क्योंकि भारत के पास इजाजत नही थी कि वो परमाणु बम बना सके लेकिन भारत को शक्तिशाली बनने से ये बात नही रोक सकी।
                             एयरोस्पेस इंजीनियर डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम जी ने प्रधानमंत्री जी से कहा कि वो परमाणु हथियार बनाना चाहते है भारत के लिए तो उन्होंने अनुमति दे दी। जैसा कि ये काम चोरी से होना था तो सॅटॅलाइट की नज़र उस जगह से हटाने के लिए भारत ने अपने बॉर्डर पर सैनिको को और बढा दिया जिससे लोगो को लगा कि भारत किसी देश पर हमला करने वाला है और सभी सैटेलाइट्स की नज़र इस जगह हो गयी। 
                              और इधर चुपके से परमाणु परीक्षण कर लिया गया। इसका परीक्षण जिस मिसाइल से किया गया था उसका नाम शक्ति मिसाइल था। इसका परीक्षण पांच मिसाइल दाग कर राजस्थान के पोखरन में किया गया। उसके बाद उसके सफल होने पर भारत के प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी जी ने घोषणा की कि भारत 6वां परमाणु देश बन गया है।

भारत मे परमाणु बम कैसे बना?


जैसा कि आप जानते हैं ये काम चोरी छुपे होता था इसलिए जितने भी लोग इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे सभी के सभी रात को यहां काम करने आते थे ताकि उन्हें कोई देख न पाए। यह पूरा प्रोजेक्ट कलाम जी के नेतृत्व में चल रहा था। काफी वैज्ञानिको की मेहनत और लगन की वजह से ही परमाणु हथियार जल्दी ही तैयार हो गया और भारत एक शक्तिशाली देश बन गया जिस पर कोई नज़र भी उठा कर नही देख सकता अब।

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शनिवार, 11 अप्रैल 2020

Good Friday : A black Friday in history of christian religion

 Good Friday christian समुदाय से जुड़ा हुआ है। इस साल Good Friday 10 अप्रैल 2020 को था। इस त्यौहार को Good Friday , Black Friday या Great Friday के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार christian लोगो का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है क्योंकि Good Friday के ही दिन jesus christ को सूली पर चढ़ाया गया था। वैसे तो यह दिन एक त्यौहार है लेकिन christian समुदाय के लिए ये एक दुख का दिन है क्योंकि इसी दिन उनके भगवान को लोगो ने सूली पर चढ़ा दिया था। वो भी बिना किसी गलती के।

क्यों मनाते हैं goodfriday?

बहुत समय पहले christian समुदाय में lord jesus christ का जन्म हुआ था। उस समुदाय के लोगो का मानना था कि ये भगवान के अवतार हैं। और भगवान ने उन्हें लोगो को ज्ञान बांटने और सहायता करने के लिए पृथ्वी पर भेजा है। लेकिन उस वक़्त के यहूदी लोग बहुत ही कट्टरपंथी थे। और वे उनका विरोध करने लगे और उन्हें मारने की सोचने लगे। उन्होंने रोमन सरकार से कहा कि इन्हें सूली पर चढ़ा दिया जाए। जिसको रोमन सरकार ने डरकर मान लिया। क्योंकि उनको डर था की कहीं उनके न कहने पर यहूदी उन्हें ही न मार दें। और उसके बाद बिना किसी गलती के lord jesus chrisht को ढेर सारी दुःखद यातनाएं दी गयी जैसे उनको कांटो का ताज पहनाया गया, चाबुक से मारा गया और फिर उन्हें सूली पर लटका दिया गया।
          
 जो लोग उनको सूली पर लटका रहे थे उनके लिए उन्होंने कहा था कि हे भगवान ये नही जानता कि ये क्या कर रहा है कृपया इसे माफ कर दीजिए। और जब वो मरने वाले थे तो उन्होंने भगवान से कहा कि हे प्रभु मैं अब अपनी आत्मा को आपके हवाले करता हूँ। सूली पर लटकाये जाने के तीसरे दिन यानी रविवार को वो फिर से जिंदा हो गए। इस दिन को ester sunday के नाम से जाना जाता है। ज़िंदा होने के बाद वो 40 दिनों तक अपने अनुयायियों के साथ रहें और उन्हें ज्ञान देते रहें। क्योंकि जो लोग उन्हें मार रहे थे उनके लिए भी jesus ने भगवान से क्षमा मांगी इसी से पता चलता है कि वो सच मे भगवान ही थे । 
                     और इसीलिए वो दिन जिस दिन उनको सूली पर चढ़ाया गया था को Good Friday के रूप में मनाने लगे। और  इसे बलिदान का दिन या क्षमा और दया का भी दिन कहा जाता है।
          
कैसे मनाते हैं Good Friday ? 
 Good Friday का त्यौहार english कैलेंडर के अप्रैल महीने में पड़ता है यह दिन christian लोगो के लिए बलिदान का दिन होता है। इस दिन इस समुदाय के लोग उपवास रखते हैं और गिरजाघर में जाकर lord jesus christ की पूजा करते हैं। उनको याद करते हैं और उनके द्वारा बताए गए उपदेशो को याद करते हैं। और उनको अपनी ज़िंदगी मे पालन भी करते हैं। इसके तीसरे दिन estersunday होता है जिस दिन lord jesus फिरसे ज़िंदा हुए थे। इस रविवार को लोग सुबह ही गिरजाघर जाकर lord jesus को याद करते हैं। इस सुबह की प्रार्थना को mroning service कहते हैं।

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बुधवार, 1 अप्रैल 2020

महावीर जयंती (Mahavir Jayanti)

महावीर जयंती भगवान महावीर के जन्म दिवस पर उनके जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत मे मनाई जाती है। यह भारत के अलावां उन देशों में भी मनाई जाती है। जहां जैन लोग रहते हैं, यह त्यौहार जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। महावीर जयंती  का एक और नाम है महावीर जन्म कल्याणकमहावीर जयंती हिन्दू कैलेंडर से चैत्र मास के शुक्लपक्ष में तेरहवें दिन मनाई जाती है। महावीर जयंती अंग्रेजी कैलेंडर  से मार्च या अप्रैल माह में आती है।इस साल की महावीर जयंती 6 अप्रैल 2020 को है। यह महावीर जी का 2618वां जन्म दिवस है। महावीर जयंती में जैन धर्म के सभी लोग श्वेतांबर और दिगाम्बर मिलकर इस त्यौहार को बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। महावीर जयंती के दिन पूरे भारतवर्ष में सरकारी अवकाश रहता है।

कैसे मानते हैं महावीर जयंती?


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 महावीर जयंती जैन धर्म का महत्वपूर्ण त्यौहार होने के साथ साथ हिन्दुओ द्वारा भी मनाया जाता है। इसकी तैयारियां त्यौहार के कई दिनों पहले से शुरू हो जाती हैं। इस दिन जैन धर्म को मानने वाले या जो लोग महावीर जी को मानते हैं, वो सभी लोग जैन मंदिर जाते हैं। इस दिन  जैन धर्म के सभी मंदिरो को फूलों और झंडो से बहुत ही अच्छे तरीके से सजाया जाता है।
                                   महावीर जयंती के दिन का कार्यक्रम महावीर जी के अभिषेक से होता है। जिसमे महावीर जी को पानी से स्नान कराया जाता है। उसके बाद पूजा होती है और फिर शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दिन लोग महावीर जी की पूजा करने मंदिर जाते हैं, और वहां काफी समय व्यतीत करते हैं। शोभायात्रा खत्म होने के बाद बड़े बड़े ज्ञानी लोग जैन धर्म के बारे में ज्ञान देते हैं और लोगो एक अच्छा जीवन जीने के मार्ग को दिखाते हैं।इस दिन जैन धर्म के लोग गरीबो में फल, अनाज, कपड़े आदि का वितरण करते हैं।

क्यों मनाते हैं महावीर जयंती?


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                 महावीर जयंती महावीर जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महावीर जी जैन धर्म के 24वें और आखिरी तीर्थंकर थे।
                            महावीरजी का जन्म लगभग 600 ई●सा● पूर्व बिहार में चैत्र मास के शुक्लपक्ष में 13वें दिन हुआ था। इनका जन्म एक राजा के परिवार में हुआ था।इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था। महावीरजी का बचपन का नाम वर्द्धमान था। इनके भी का नाम नंदिवर्धन और बहन सुदर्शना थीं। इनकी पत्नी का नाम यशोदा था और पुत्री प्रियदर्शना थीं।
                                माता पिता की मृत्यु के बाद 30 वर्ष की आयु में इन्होंने वैराग्य ले लिया। 12 साल की कठोर तपस्या के बाद जम्बक में शाल्व वृक्ष के नीचे इन्हें सच्चा ज्ञान प्राप्त हुआ। उसके बाद इनका नाम केवलीन हो गया। और वे इसी नाम से प्रसिद्ध हुए। बड़े बड़े राजा महाराजा उनका अनुशरण करने लगे उनमे प्रमुख थे बिम्बिसार।
                        72 वर्ष की उम्र में इन्होंने देह का त्याग किया। इन्होंने पांच सिद्धान्त दिए जिसे पंचशील सिद्धान्त के नाम से जाने जाते हैं। भारत इन्ही पंचशील सिद्धान्तों को अपने संविधान में रखकर और पालन करके आज पूरे विश्व मे एक अच्छा देश बनकर उभरा है। महावीरजी का कहना था "जियो और जीने दो।"

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शुक्रवार, 27 मार्च 2020

होली मनाने का कारण(क्यों मनाते हैं होली?) होलिका दहन

होली भारत और नेपाल में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है इसको मानने के पीछे हिन्दू
धर्म की एक पुरानी कथा है और रिसर्च से पता चला है कि इसके कुछ साइंटिफिक रेअसोंस भी हैं
 कथा

बहुत समय पहले की बात है भारत में राजा हुआ करता था जिसका नाम था हिरण्यकश्यप वो तीनो लोको पृथ्वी,स्वर्ग और पाताल पर राज्य करना चाहता था इसके लिए उसने ब्रम्हा जी की तपस्या की काफी तपस्या के बाद ब्रम्हा जी प्रकट हुए और उससे
कहा,"वत्स वर मांगो क्या चाहते हो" हिरण्यकश्यप ने कहा कि प्रभु मुझे अमर कर दो तो ब्रम्हा जी ने कहा कि ऐसा वरदान तो नहीं दिया जा सकता कुछ और मानगो तो उसने कहा कि प्रभु मुझे वरदान दो कि मुझे न कोई इंसान मार सके न कोई जानवर कीड़ा और न ही कोई भगवन मार सके मुझे न घर के अंदर मारा जा सके न घर के बहार न मुझे दिन में कोई मार सके न ही रात में और न ही मुझे किसी हथियार से मारा जा सके. ब्रम्हा जी ने ये आशीर्वाद दे दिया जिससे हिरण्यकश्यप को लगने लगा की अब तो वो अमर हो गया अब उसे कौन मार सकता है. वो अपने राज्य वापस आया और लोगो से कहने लगा की वो भगवन की पूजा करना छोड़ कर अब उसकी पूजा करें क्यूंकि वही भगवान है और जो उसकी बात नहीं मन उसको मरवा दिया उसका अत्याचार पुरे राज्य में बहुत ज्यादा बढ़ गया था धीरे धीरे उसका अत्याचार बढ़ गया और उसने स्वर्ग पर हमला कर दिया और उस पर भी अधिकार कर लिया.
        कुछ दिनों के बाद उसको एक लड़का हुआ जिसका नाम प्रह्लाद था वो स्वाभाव से बहुत शांत और साधारण था उसे अपने ऊपर थोड़ा भी घमंड न था उसके पिता ने जब उससे कहा कि वही तीनो लोको के भगवन है तो प्रहलाद ने कहा की नहीं तीनो लोको के भगवान् तो भगवान् विष्णु है उनके सिवा कोई नहीं है और मेरा तो आपसे भी यही कहना है की आप भी उनकी पूजा किया करिये ज़िंदगी सफल हो जाएगी. बेटे की इस बात से हिरण्यकश्यप को बहुत गुस्सा आया लेकिन उसने किसी तरह खुद पर काबू किया, कुछ दिनों के बाद
प्रहलाद को शिक्षा के लिए गुरुकुल भेजा गया,हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद के गुरूजी से कहा कि इसको समझा दीजिये कि इस संसार का भगवान् मै ही हूँ कुछ दिनों की शिक्षा के बाद जब गुरूजी प्रहलाद को लेकर वापस घर आये तो उन्होंने बताया कि ये इस बात को मानने को ही तैयार नहीं की आप भगवान्


हैं और तो और इसने गुरुकुल के और भी बच्चों को बिगाड़ दिया है और सबसे कहता फिरता है की भगवान् तो विष्णु हैं ये सुनकर हिरण्यकश्यप को गुस्सा आ गया और उसने सैनिकों को आदेश दिया कि इसे लेजाकर पहाड़ी से नीचे फ़ेंक दो. सैनिकों ने ऐसा ही किया लेकिन प्रहलाद बच गए और वो वापस आ गए और अपने पिता से कहा की अभी भी वक़्त है आप भगवन विष्णु की शरण में चले जाईये और आप मुझे मार नहीं पाएंगे क्युकी मेरी रक्षा भगवान् विष्णु करते हैं. हिरण्यकश्यप ने आदेश दिया की इसे हाथी के पैरो के नीचे ले जाकर दाल दो. सैनिकों ने ऐसा ही किया लेकिन हाथी ने उन्हें कुचला ही नहीं और वो फिर बच गए. अब हिरण्यकश्यप ने अपने बहन होलिका को बुलाया जिसको वरदान मिला था की आग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया की तुम प्रहलाद को लेकर आग में बैठ जाओ जिससे ये मर जाये. होलिका ने ऐसा ही किया लेकिन भगवान विष्णु की ऐसी कृपा की होलिका जल कर राख हो गयी और प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ.इसी दिन को हम होली के रूप में मनाते हैं. होली नाम होलिका के नाम पर पड़ा था और इसी दिन हम हर साल होलिका दहन करते हैं क्यूंकि ये दिन अच्छाई पर बुराई की जीत का दिन है.जब इससे भी प्रहलाद की मौत नहीं हुई तो हिरण्यकश्यप ने खुद उसे मारने का सोचा और अपनी तलवार से उस पर वार किया लेकिन वो तलवार खम्बे पर जा लगी जिससे उसमे से भगवन विष्णु नरसिंघा के रूप में निकले जिसमे वो आधे इंसान और आधे जानवर थे और वो वक़्त रात होने के थोड़े पहले का समय था जो की दिन में भी नहीं आता और फिर विष्णु भगवान् उसे दरवाजे के पास चौखट पर लेजाकर अपने नाखूनों से उसका पेट फाड़ कर उसका वध कर दिया क्युकी चौखट न घर के अंदर की जगह है न ही बाहर की और नाख़ून कोई हथियार नहीं. इस तरह भगवान ने एक और राक्षस का वध कर इस संसार को पाप से मुक्त किया 

होली (रंगों का त्यौहार) full knowledge

होली  प्रेम और रंगों का त्यौहार  है।साथ ही साथ अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक भी है।
होली  का त्यौहार हिन्दू धर्म का एक बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है इसे रंगों का त्यौहार  भी कहा जाता है। यह त्यौहार चैत्र मास के प्रथम दिन पड़ता है यह हिन्दू वर्ष का पहला दिन होता है जिस दिन होलिका दहन  होता है और उसके अगले दिन रंगों की होली  खेली जाती है ।
      यह त्यौहार अंग्रेजी वर्ष से मार्च महीने में पड़ता है जब भारत मे ठंडी खत्म हो चुकी होती है इस त्यौहार की तैयारियाँ महीनों पहले से शुरू हो जातीं हैं लोग अपने घरों की साफ सफाई करते हैं पेंटिंग करवाते है और नए कपड़े खरीदते हैं।




                                                        होलिका उत्सव के दिन लोग अपने शरीर मे उबटन( बुकवा) लगाते हैं जिससे शरीर की सारी गंदगी निकल जाती है। फिर उस निकले हुए मैल को होलिका में डाल दिया जाता है। होलिका दहन का आयोजन जगह जगह होता है या ये कहें कि हर चौराहे पर होता है जिसमे पुराने कपड़े घर की गंदगी पुरानी लकड़िया और मैल जलाई जाती है लोग इस त्योहार में बड़े खुश रहते हैं।




अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है जिसमे लोग अपने मित्रों, रिश्तेदारों को रंग लगा कर होली की हार्दिक शुभकामनाये देते हैं। छोटे बच्चे पानी वाले रंगों से खेलना पसंद करते हैं जिसमे वो पिचकारी से लोगो पर रंग डालते हैं। ये रंग काफी हानिकारक होते हैं इसलिए जितना हो सके इन रंगों से बचें क्योंकि ये रंग synthetic रंग होते हैं। होली की सुबह श्रीकृष्ण और राधाजी की पूजा की जाती है और उनको रंग लगाया जाता है । ब्रज की होली बहुत प्रसिद्ध है वहां होली बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है। वैसे तो होली का रंग पूरे देश मे दिखता है लेकिन ब्रज,वृंदावन और मथुरा की होली विश्व प्रसिध्द है।घर मे उस दिन अच्छे अच्छे पकवान बनते हैं। कई तरह की मिठाइयाँ बनती हैं गुजिया, नमकीन आदि। इस दिन लोग साथ मे बैठ कर भोजन करते हैं। इस दिन सुबह के वक़्त भरपूर रंग लगाते हैं और शाम को लोग अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं और एक दूसरे को गुलाल का टीका लगा कर गले मिलते हैं और छोटे बच्चें बड़ो को गुलाल लगा कर उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेते हैं।
                होली का त्यौहार न सिर्फ भारत मे बल्कि पूरे विश्व मे बहुत ही हर्सोल्लास के साथ मनाया जाता है।विभिन्न देशों में यह त्यौहार भिन्न-भिन्न तरीको से मनाया जाता है कहीं टमाटर से तो कहीं रंगों से ही।



होली messages

होली में लोग अपने प्रियजनों के पास हास्यास्पद संदेश भेजते हैं और एक दूसरे का मज़ाक उड़ाते हैं। मेरे तरफ से एक सदेश पेश है आपके लिए

"इस बार की दीवाली अत्यंत आनंदमय रही लोगो ने पर्यावरण का बहुत ख्याल रखा एक भी पटाखा नही फोड़ा। आज के दिन ही रामजी ने रावण को मारा था इसीलिए आज का दिन रामनवमी की आपको और आपके परिवार के सभी लोगो को हार्दिक शुभकामनाएं । आज जब नवरात्र खत्म होने के बाद मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे थे तो काफी अच्छा लगा भंडारे में लोग दूध पिला रहे थे जिसको पीने के बाद माहौल भक्तिमय हो जाता था मेरा तो बस यही कहना है कि ये त्योहार भाई- बहन के रिश्ते का प्रतीक है अतः सभी बहनें अपने भाई को पटाखा बांध कर मिठाई खिलाकर नागपंचमी मनाएं।

कुछ लोग इस पावन पर्व पर भांग पी लेते हैं तो मेरा कहना है कि भांग बहुत बुरी चीज है अगर कहीं भी दिखाई दे तो उसे तुरंत खत्म कर दें और निवेदन है कि गाड़ी पीकर भांग में होली न चलाएं।


आपको और आपके परिवार को  होली की हार्दिक शुभकामनाएं"

विदेशो की होली (विदेशो में कैसे मनाते हैं होली?)

हम जानते हैं कि होली एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली न सिर्फ भारत मे बल्कि विदेशो में भी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है कुछ देशों में इसेहोली  नाम से ही जाना जाता है तो कुछ देशों में इस दूसरे नामो से। कुछ देश होली  जैसा ही त्यौहार मानते हैं और उन त्यौहारो के पीछे अलग अलग कथाएं प्रचलित हैं जो वहां पर कहीं जाती हैं लेकिन वो किसी और दिन उनके यहां होता है जैसे मैं आपको कुछ देशों के नाम बताने जा रहा हूँ और बताने जा रहा हूँ कि वहां उसे किस तरह मनाते हैं।

1) नेपाल-  ये भारत का पड़ोसी देश है और हपलो मनाने में भारत से कहीं पीछे नही है यहां पर होली के दिन लोगो पानी भरे गुब्बारे फेकने का रिवाज है।

2) म्यांमार- यहां इस त्यौहार को मेकांग के नाम से मनाया जाता है यहां का रिवाज है कि इस दिन लोग लोगो पर पानी और रंग फेंकते हैं इस त्यौहार में पूरा देश हिस्सा लेता है यह त्यौहार म्यांमार में म्यांमार के नववर्ष पर मनाया जाता है। इस त्यौहार को थिंगयांग नाम से भी जाना जाता है।

3) जापान- जापान में इसे एक अनूठा त्यौहार माना  जाता है जापान में यह त्यौहार मार्च- अप्रैल के महीने में मनाया जाता है और इस त्यौहार में लोग एकदूसरेके ऊपर रंग फेंकते हैं।

4) मॉरीशस- होली का त्यौहार अगर कहीं अच्छे से मनाया जाता है तो वो मॉरीशस ही है यह त्यौहार यहां वसंतपंचमी से लेकर यह त्यौहार 40 दिनों तक मनाया जाता है और इस बीच लोग एक दूसरे के ऊपर भरपूर रंग फेंकते हैं। और तो और यहां भारत की तरह होलिका दहन भी होता है।



5) चीन- चीन में दाय समुदाय के लोग हैं जो नववर्ष के दिन लोगो पर होली की तरह ही पानी फेंकते हैं और पूरा दिन गाना गाते हैं।

6) रोम- रोम में मई महीने में एक त्यौहार मनाया जाता है जिसका नाम है रेडिका इस त्यौहार में ऊंचे से स्थान पर ढेर सारी लकड़ियां इक्कठी करके उन्हें जलाया जाता है और उसके पास बैठ कर गाना गाते हैं।



7) ग्रीस- यहां पर यह त्यौहार टमाटर से खेल जाता है इसमे तरबूज के आकार के बड़े बड़े टमाटर उगाये जाते हैं जिन्हें love apples कहा जाता है और इसके साथ ही रंग बिरंगी रंगों को एक दूसरे के ऊपर फेंक कर तेज़ शोर के साथ लोग पूरे दिन इस त्यौहार का आनंद लेते हैं।

8)  अफ्रीका- अफ्रीका का बोंगा त्यौहार कुछ होली जैसा ही है यह त्यौहार अफ्रीका के कुछ देशों में मनाया जाता है इसमें एक जंगली देवता प्रिंबोंगा को जलाया जाता है इसमें ढेर सारी लकड़ियां इक्कठी की जाती हैं और उनको जलाया जाता है और लोग उसके चारों तरफ इक्कठे होते हैं नाचते गाते हैं और नई फसल आने की खुशी मानते हैं।
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9) श्रीलंका- श्रीलंका में यह त्यौहार भारत के होली की ही तरह मनाया जाता है और भारत के होली के दिन ही मनाया जाता है।

10) चेकोस्लाविया- यहां पर एक बलियाकनोसे नाम से त्यौहार मनाया जाता है जो बिल्कुल होली के त्यौहार जैसा होता है इसमें लोग एक दूसरे पर रंग डालते हैं और खुशियां मानते हैं।

11) स्पेन- स्पेन में होली से ही प्रेरित होकर होली जैसा ही त्योहार मनाया जाता है लेकिन वहां अलग अलग राज्यो में इसे अलग अलग नामो से जाना जाता है।

12) पोलैंड- पोलैंड में अरशीना नाम का टीफार मनाया जाता है जिसमे लोग एक फुसर पर रंग डालते हैं और पुरानी दुश्मनी भूल कर लोगो को गले लगाते हैं।

होली मनाने के वैज्ञानिक कारण, आखिर क्यों मनाते हैं होली?

होली  चैत्र मास के प्रारंभ में पड़ता है। इसको मनाने के पीछे हिन्दू धर्म मे होलिका के मृत्यु को बताया जाता है, लेकिन कई वैज्ञानिक शोधों के बाद पता चला है कि इसके कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं। जिनके बारे में हम इस लेख में बताने जा रहे हैं। इस लेख में हम पांच वैज्ञानिक कारणों को बताएंगे जिसकी वजह से होली हमारे जीवन मे महत्व रखती है।

1) ठंडी का अंत और गर्मी की शुरुआत-  होली मार्च महीने में मनाई जाती है और ये वो समय होता है जब ठंडी खत्म हो चुकी होती है और गर्मी का मौसम आने वाला होता है। इस बीच के मौसम को बसंत कहते हैं। इस मौसम में ठंडी के बाद कई तरह के नए वायरस और कीड़े जन्म लेते हैं और कई कीड़े जो ठंडी की वजह से छुप गए थे वो भी बाहर निकलने लगते हैं और इसी वक्त होली आ जाती है जिससे लोग अपने घरो की साफ सफाई करते हैं। जिससे वो जो वायरस जन्म लेने वाले होते हैं मर जाते हैं और इंसान कई तरह के नई बीमारियों से बच  जाता है।

2) उबटन लगाना- इस त्यौहार में लोग शरीर मे सरसो पीस कर लगाते हैं जिससे शरीर की सारी गंदगी बाहर आ जाती है। क्योंकि ठंडी के दिनों में लोग सही से नहा नही पाते और उनके शरीर मे गंदगी हो जाती है तो वो इसके साथ निकल जाती है।

3) आलस्य का आना - ये मौसम ऐसा होता है की लोगो को कोई भी काम करने में आलस्य आता है। जिससे उनका किसी काम मे मन नही लगता लेकिन जब उनको होली का त्यौहार मनाना होता है तो वो खुशी खुशी काम मे लग जाते हैं और इसके बाद लोग साथ मे बैठ कर गाना गाते हैं जिससे उनको आलस्य नही आता।

4) होलिका दहन- रंगों वाली होली के पहले होलिका दहन होता है। जिससे गर्मी और धुआं निकलता है। जिससे आस पास का वातावरण गरम हो जाता है और वो कीड़े मकोड़े और वायरस जो ठंडी की वजह से पैदा हुए थे मर जाते हैं और वातावरण शुद्ध हो जाता है ।साथ ही साथ ये भी कहा जाता है कि जो उबटन( सरसो ) आपने अपने शरीर मे लगाया था उसे भी उसी में जल देना चाहिए क्योंकि हमारे शरीर मे भी ठंडी की वजह से कई तरह के वायरस जन्म ले लेते हैं। जो सरसो के साथ निकल जाते हैं और आग में जलने पर हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं और उसके होलिका दहन के पास खड़े होने से हमारे शरीर को गर्मी मिलती है जिससे गर्मी की वजह से शरीर के अंदर के भी नए जन्मे वायरस मर जाते हैं और हम साफ और सुरक्षित हो जाते हैं।

5) रंगों का प्रभाव- होली में लोग एक दूसरे के ऊपर रंग फेंकते हैं जिससे की लोगो मज़ा आता है लेकिन इसके साथ ही साथ लोग ढेर सारी मस्ती भी करते हैं जिससे लोगो का exercise भी हो जाता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है साथ ही साथ लोग जो गुलाल ये रंग डालते हैं उनमें ion पाया जाता है जो कि हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। जिससे हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और नया जोश आ जाता है।

शुक्रवार, 13 मार्च 2020

रामनवमी ( full knowledge)

नमस्कार ! आज मैं बताने जा रहा हूँ कि रामनवमी क्यों मनाते हैं? रामनवमी का त्योहार राम जी के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्लपक्ष में नवमी के दिन पड़ता है इसलिए इसे रामनवमी कहते हैं।रामनवमी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, हिंदू लोग इस त्योहार को बहुत धूमधाम से मनाते हैं खासकर अयोध्या में ।
               इस साल की रामनवमी 2 अप्रैल 2020 को है। इस दिन सरकारी छुट्टी रहती है।
                             बहुत समय पहले की बात भारत देश मे अयोध्या राज्य में एक राजा थे। जिनका नाम था राजा दशरथ उनकी तीन पत्नियां थीं कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा उनके कोई पुत्र या पुत्री नही थे जिससे वो काफी चिंतित थे। उन्होंने काफी उपाय किये लेकिन उनके कोई संतान नही हुए। उन्होंने पंडित लोगो को दिखाया तो पता चला कि उनके भाग्य में संतान सुख नही है।
          एक बार की बात है वो शिकार करने जंगल मे गए हुए थे तभी उन्हें सरोवर के पास कुछ आवाज़ सुनाई दी उन्हें लगा कि कोई जानवर पानी पीने आया है और उ होने शब्दभेदी बाण चला दिया जो कि जाकर उसको लगा जहां से आवाज़ आ रही थी जो कि कोई जानवर नही था बल्कि श्रवण कुमार थे जो कि अपने अंधे माता पिता के लिए पानी लाने गए थे जिनको वो तीर्थ यात्रा पर लेकर आये थे। दशरथ को जब पता चला कि उनका बाण किसी इंसान को लगा है तो वो बड़े दुखी हुए वो श्रवण कुमार के पास गए जो कि अपनी आखिरी सांसे गईं रहे थे उनसे माफी मांगी तो श्रवण कुमार ने कहा कि अब जो हो गया वो वापस तो आएगा नही बस आप मेरा इतना काम कर दीजिये मेरे माता पिता प्यासे हैं उन्हें ये पानी ले जाकर पिला दीजिये और मेरे बारे में भी बता दीजियेगा इतना कहते कहते वो मर गए और दशरथ पानी लेकर उनके माता पिता के पास गए और श्रवण कुमार के मौत के बारे में बताया जिससे श्रवण कुमार के माता पिता काफी दुखी हुए और उसी दुख में मर गए और मरते मरते दशरथ को श्राप दिया कि जिस तरह मैं पुत्र वियोग में मार रहा हूँ उसी तरह तुम भी पुत्र वियोग में मरोगे इससे दशरथजी के भाग्य में पुत्र योग हो गया।
                कुछ समय बाद पंडितजी ने उन्हें यज्ञ कराने  को कहा जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति होगी। उन्होंने यज्ञ कराया और चार पुत्रो की प्राप्ति हुई राम,भरत,लक्ष्मण और शत्रुघ्न । सबसे बड़े पुत्र राम भगवान विष्णु के अवतार थे जो कि राक्षस रावण को मारने के लिए आये थे। उनका जन्म जिस दिन हुआ था वही रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हिन्दू पत्रा से चैत्र मास के शुक्लपक्ष में नवमी के दिन पड़ता है इसलिए इसका नाम राम नवमी है।

रामनवमी के पर्व मुख्य रूप से अयोध्या में मनाया जाता है क्योंकि ये रामजी की जन्मभूमि है। इस दिन अयोध्या में बहुत बड़ा मेला लगता है और लोग दूर दूर से यहां रामजी की पूजा करने आते हैं।

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

WHY WE CELEBRATE CHRISTMAS ? (FULL STORY)

Christmas Day is celebrated because at this day Lord Jesus was born and we celebrate this as his birthday. He is God is Christian religion.




about 2,000 years ago, In a small town called Nazareth. There was a small house where lived a young Jewish girl named Mary. She was not married but she was going to be real soon to a good man named Joseph. Well one day something amazing happened. An angel of the Lord Gabriel a very important angel appeared to Mary. Mary asked, "Who are you?"" Angel said, "I am Gabriel don't be afraid Mary you have found favor with God he loves you very much. God has sent me here to tell you that soon you'll have a son." Mary surprised, "Huh me my son!" He said, " Yes as son he will be called Jesus he will be great and will be called the son of God." Mary was very obedient and she said, "I am the handmaid of the Lord may God do with me." As he wants to Mary wanted to do just as God told her to do. Just near the time Mary was about to have her baby the Roman Emperor sent soldiers to announce a new Lord, "Okay listen everyone the Emperor Caesar Augustus says that all of you need to pay some taxes now and register for census." So Mary and Joseph made their way to Bethlehem because that's where Joseph had to pay taxes. It was about 65 miles from Nazareth to Bethlehem and the trip took many many days and when they reached Bethlehem guess what happened. All the places ruffle all the ends were full. Joseph said, "Mary you wait here make yourself comfortable by then I will try to find a suitable place for us to stay." Joseph kept knocking and knocking again and again he had been looking and looking for a place to stay. Amiri was about to have a baby. Joseph become sad and said, "Well I have tried almost all the ends and it looks like all of them are full dear Mary how do you feel." She replied,"I am very tired Joseph but please don't worry I am sure God will provide a place for us." Poor Joseph and Mary were so tired and didn't know what to do . Joseph requested God to help. Help me! He have no idea no clue. It's sad that Mary and Joseph had no place to stay no place to go a place. No one would have expected the Son of God to be born in it wasn't a palace not some castle not in a fancy building either God's son was born in a humble small stable. Joseph said, "I'll go and get some fresh hay where you can sleep comfortably tonight."  That night Jesus was born and oh it was a wonderful night big star shining in the sky there was no crib so they laid baby Jesus in a manger. It was full of fresh hey I made it a little comfortable for the baby. Near Bethlehem that night there were some Shepherds keeping watch over their flocks of sheep when suddenly an angel appeared to them and said, "I have good news for you there is a savior who has been born." They surprised, "What? really what Savior can we see him where is he." The angel told them where to find him. The Shepherd's was so excited and happy. They ran to the stable and found Jesus there just as the angel had told them after they had seen Jesus. They told to everyone who met and everyone was surprised.




                          IN HINDI




क्रिसमस दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान यीशु का जन्म हुआ था और हम इसे उनके जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। वह ईश्वर है ईसाई धर्म।








लगभग 2,000 साल पहले, नाजारेथ नामक एक छोटे से शहर में। एक छोटा सा घर था जहाँ मैरी नाम की एक युवा यहूदी लड़की रहती थी। उसकी शादी नहीं हुई थी, लेकिन वह जल्द ही जोसेफ नामक एक अच्छे व्यक्ति के साथ वास्तविक होने जा रही थी। खैर एक दिन कुछ अद्भुत हुआ। प्रभु गैब्रियल के एक दूत ने मैरी को एक बहुत ही महत्वपूर्ण दूत दिखाई दिया। मैरी ने पूछा, "आप कौन हैं?" "एंजेल ने कहा," मैं गैब्रियल से डरती नहीं हूं मैरी ने आपको भगवान के साथ एहसान पाया है वह आपसे बहुत प्यार करती है। भगवान ने मुझे यहां यह बताने के लिए भेजा है कि जल्द ही आपको एक बेटा होगा। "मैरी ने आश्चर्यचकित होकर कहा," हुह मुझे मेरा बेटा! "उन्होंने कहा," हाँ बेटे के रूप में उसे यीशु कहा जाएगा वह महान होगा और उसे पुत्र कहा जाएगा। " भगवान की। "मैरी बहुत आज्ञाकारी थी और उसने कहा," मैं भगवान की दासी हूं जो भगवान मेरे साथ कर सकता है। "जैसा वह मैरी को करना चाहता था वैसा ही करना चाहता था जैसा कि परमेश्वर ने उसे करने के लिए कहा था। बस उस समय के करीब मरियम थी। अपने बच्चे को पालने के लिए रोमन सम्राट ने एक नए भगवान की घोषणा करने के लिए सैनिकों को भेजा, "ठीक है सभी को सुनो सम्राट सीजर ऑगस्टस कहता है कि आप सभी को अब कुछ करों का भुगतान करने और जनगणना के लिए पंजीकरण करने की आवश्यकता है।" इसलिए मैरी और जोसेफ ने बेथले के लिए अपना रास्ता बनाया। जहाँ यूसुफ को कर चुकाना था। यह नासरत से बेथलेहम तक लगभग 65 मील की दूरी पर था और यात्रा में कई दिन लग गए और जब वे बेथलेहम पहुँचे तो अनुमान लगाया कि क्या हुआ। सभी स्थानों के सभी छोर भरे हुए थे। यूसुफ ने कहा, "मैरी तुम प्रतीक्षा करो।" यहाँ अपने आप को सहज बनायें तब तक मैं हमारे रहने के लिए एक उपयुक्त स्थान खोजने की कोशिश करूँगा। ”जोसेफ ने ठिठोली और दस्तक दी आईएनजी बार-बार वह देख रहा था और रहने के लिए जगह की तलाश कर रहा था। अमीरी को बच्चा होने वाला था। जोसेफ दुखी हो गए और कहा, "मैंने लगभग सभी छोरों की कोशिश की है और ऐसा लग रहा है कि ये सभी पूर्ण प्यारे मैरी हैं, आप कैसा महसूस करते हैं।" उसने उत्तर दिया, "मैं बहुत थक गया हूँ जोसेफ लेकिन कृपया चिंता न करें मुझे यकीन है कि भगवान हमारे लिए एक जगह प्रदान करेगा।" गरीब जोसेफ और मैरी बहुत थक गए थे और उन्हें पता नहीं था कि क्या करना है। यूसुफ ने परमेश्वर से मदद करने का अनुरोध किया। मेरी मदद करो! उसका कोई पता नहीं है। यह दुखद है कि मैरी और जोसेफ के पास रहने के लिए कोई जगह नहीं थी और न ही कोई जगह थी। किसी ने भी भगवान के पुत्र के जन्म की उम्मीद नहीं की होगी, यह महल नहीं था कुछ महल नहीं एक फैंसी इमारत में या तो भगवान का बेटा एक विनम्र छोटे से स्थिर में पैदा हुआ था। जोसेफ ने कहा, "मैं जाऊंगा और कुछ ताजा घास पाऊंगा जहां आप आज रात आराम से सो सकते हैं।" उस रात यीशु का जन्म हुआ था और ओह यह एक अद्भुत रात थी जब आकाश में चमकता हुआ एक बड़ा तारा था, इसलिए कोई पालना नहीं था, इसलिए उन्होंने यीशु को एक खंजर में रख दिया। यह ताजा हे से भरा था मैंने इसे बच्चे के लिए थोड़ा आरामदायक बना दिया।उस रात बेथलहम के पास कुछ चरवाहे अपनी भेड़ों के झुंड पर नज़र रख रहे थे जब अचानक एक देवदूत उनके पास आया और कहा, "मेरे लिए आपके लिए खुशखबरी है कि एक उद्धारकर्ता पैदा हुआ है।" उन्होंने आश्चर्यचकित किया, "क्या? वास्तव में क्या उद्धारकर्ता हम उसे देख सकते हैं कि वह कहाँ है?" स्वर्गदूत ने उन्हें बताया कि उसे कहाँ खोजना है। शेफर्ड बहुत उत्साहित और खुश था। वे भागते हुए स्थिर हुए और यीशु को वहाँ पाया जैसे कि स्वर्गदूत ने यीशु को देखने के बाद उन्हें बताया था। उन्होंने सभी से मुलाकात की और सभी को आश्चर्य हुआ।

शनिवार, 26 अक्तूबर 2019

TOP 30 SHAYRI FOR DIWALI



1)-   Saal bhar padosiyon ko chahe muh na dikhana,
       lekin diwali ke din mithai khane zaroor jana.
     

2)-   Humne bhi ki hai diwali ki saaf safai,
       apne mobile se sari video aur chat history hatai.
       

3)-   Diwali par ghar ki safai karega aapka pura parivar,
        acche se chhupana apne girlfriend ya boyfriend ka uphaar.
     

4)-   Abki diwali me diye kuch is prakaar jalayen,
        ghar aur dimag dono me ujala ho jaye.
     

5)-   Diyo se saje us parv me, paawan sa wo sama hoga.
       Har taraf khushaali hogi,jab us raat diwali hogi.
     

6)-   Mubarak ho aapko diwali ka yah tyohaar,
        jo jivan me laaye aapke khusiyaan aur pyaar.
   
7)-    Har taraf dil me pyar ho aur muh me mithas,
         andheri raat bhi roshan ho chahe jami ho ya aakash.
     


8)-    Pal pal sunahare phool khile,
         kabhi na ho kanto ka samna.
        Zindgi aapki khusiyon se bhari rahe,
         deepawali par humari yahi subhkamna.
       

9)-     Roshan ho deepak aur sara jag jagmagaye,
          liye sath sita maiya ko ramji hain aaye.
          Har sahar yun lage mano ayodhya ho,
          aao har dwar har gali har mod par deepak jalayen.
       

10)-.  Hontho par hansi aur aankho me khusi ho,
          gham ka kahin naam na ho.
        Ye diwali laye aapki zindgi me itni khusiyan,
         jiski kahin shaam na ho.
         

11)-   Aapko dipawali  ki subhkamnaaye,
         hum dete aapko lakho duayein.
        Naya saal ho purane jaisa yaadgaar,
        aap sabko  mile apni khusiyon ka sansaar.
       

12)-  Dipawali ka ye paawan tyohar,
        jeevan me laaye khusiyaan apaar.
       Lakshmi ji viraje aapke dwar,
        subhkamnaaye humari karein svikaar.
     

13)-  Deep jalte jagmagate rahein,
        hum aapko aap hume yaad aate rahein.
        Jabtak zindgi hai dua hai humari,
        aap yun hi diye ki tarah jagmagate rahein.
       

14)-  Muskuraate hanste deep tum jalana,
        jeevan me nai khusiyon ko lana.
       Dukh dard apne bhul kar,
       sabko gale lagana sabko gale lagana.
       

15)-  Diyon ke roshni se jhilmilata aangan ho,
        patakho ke gunj se aansma roshan ho.
        Aisi aaye jhum ke ye diwali,
       Har taraf khusiyon ka mausam ho.
         


16)-   Jamane bhar ki yaad me mujhe na bhula dena,
         jab kabhi bhi yaad aaye to zara mushkura lena.
        Zinda rahein to fir milenge,
        varna diwali me ek diya mere naam ka bhi jala lena.
          

17)-   Roshni bhi hogi ,honge chirag bhi,
         aawaz bhi hogi,honge saaz bhi.
        Par na hogi uski parchhai,na uski aahat,
        kitni suni hogi mere liye diwali ki raat bhi.
       


18)-   Bin sanam hum diwali kaise manayen,
         tanhai me khusi ke deep kaise jalayein.
        Diyon ki roshni se jalta hai mera dil,
        kahdo in diyon se ye diwali na manayein.
         


19)-  Diwali ke diyon sa chehra ho khilta tumhara,
        lakho karodo khusiyaan milen daulat ka bas ho nazara.
        Bago ke mahakte gulo sa harsu ho khusboo ka dera,
        mubarak ho aapko ye jagmagati diwali ki bela.
        


20)-  Aasani se dil lagaye jate hain,
        magar mushkil se waade nibhaaye jaate hain.
        Mohabbat le aati hai un raahon par,
         jahan diyon ke badle dil jalaye jate hain.
         

21)-  Diwali ke baad ki subah unke liye badi khusiyaan lekar aati hain,
        kuch pathakhe unke liye tum bina jale chhod diya karo kyuki us waqt unke chehre par khusiyaan nazar aati hain.
           


22)-  Nav deep jale nav deep khile,
        nit nayi bahar mile.
       Deepawali ke paawan avsar par aapko,
       maa lakshmi ka aashirvaad mile
       


23)-  Aapko aashirvaad mile ganesh se,
        vidya mile sarswati se.
        Daulat mile lakshmi se,
        khusiyaan mile rab se.
       Pyar mile sab se,
       yahi dua hai is dil se.
       
24)-   Pooja ki thali rasoi me pakwaan,
         aangan me diya khusiyaan ho tamam.
        Hantho me phooljhariyaan roshan ho jahan,
        mubarak ho aapko diwali meri jaan.
           


25)-   Diyo ki roshni se jhilmilata aangan ho,
         patakho ki gunjo se aasman roshan ho.
        Aisi aaye jhum ke ye diwali,
        har taraf khusiyon ka mausam ho.
         


26)-   Patakho ki aawaz se gunj raha sansaar,
         deepak ki roshni aur apno ka pyar.
        Mubarak ho aapko diwali ka tyohaar.
         )


27)-   Har khusi khusi mange aapse,
         har zindgi zindgi mange aapse.
         Itna ujala ho aapke jivan me ki,
         diye bhi roshni mange aapse.
        


28)-    Diye se diya tum jalana,
          ye diwali khusi se manana.
         Mita ke andhiyara tum prakash parv ko manana.
            

29)-    Gulabo ki mahak lekar tumhe ye paigaam bheja hai,
          diwali ke pahle janab khusiyon ka jaam bheja hai.
          Fateh karo har manzil ko kamyabi kadam chume,
          dil ki gahraiyon se yahi armaan bheja hai.
           

30)-    Mahlo ke jalte diyon se kutiyon me aao ujala karein,
           bojhil chehro pe khusi de mayusiyon me khusiyaan bhare.
          Tabhi ho diwali jab sare hanse mann me ujala ja base,
          ek din hi sahi par baat bane nirdhan ki aankho se ask na jhare.